मेरी दुनियाँ है तुझमें कहीं
तेरे बिन मैं क्या, कुछ भी नहीं
मेरी जान में तेरी जान है, ओ साथी मेरे
पलकों में तेरे रूप का सपना सजा दिया
पहली नज़र में ही तुझे, अपना बना लिया
है यही आरज़ू, हर घड़ी बैठी रहो मेरे सामने
मेरी दुनिया है तुझ में...
आँखों के रास्ते मेरे दिल में उतर गई
साँसों में तेरे जिस्म की खुशबू बिखर गई
हर जगह रात दिन, प्यार से मैं जानेमन, तेरा नाम लूँ
मेरी दुनिया है तुझ में...
ऐसा लगा मेरे सनम, हम जो यहाँ मिले
सेहरा में जैसे शबनमी, चाहत के गुल खिले
ये ज़मीं, आसमां, कह रहे, हम तो कभी ना होंगे जुदा
मेरे दुनिया है तुझ में...
Movie/Album: वास्तव (1999)
Music By: जतिन-ललित
Lyrics By: समीर
Performed By: सोनू निगम, कविता कृष्णमूर्ति