*जय मां शैलपुत्री*
*प्रत्येक भाव कुछ नहीं अपितु बहुत कुछ कहता है*
आज बात करते है तृतीय भाव की।
तृतीय भाव यानि पराक्रम, मेहनत, कम्युनिकेशन स्किल्स, छोटे भाई बहन और खेल कूद तृतीय भाव से संबंधित है।
परंतु तृतीय भाव और भी बहुत कुछ बताता है
✓जैसे कि आपके लग्न (प्रथम भाव) का पराक्रम, कम्युनिकेशन स्किल्स और आपके छोटे भाई बहन एवं उनके साथ संबंध है तृतीय भाव
✓आपके संचित धन और परिवार (२ भाव) का मल्टीप्लिकेशन है तृतीय भाव, क्योंकि जितना पराक्रम होगा उतना ही धन संचित होगा और जितना अपनो से संबंध अच्छा रहेगा उतना ही परिवार में प्रेम और सद्भाव बना रहेगा। तो दूसरे भाव की वृद्धि के लिए तीसरे भाव का उपयोग ज़रूरी है। अतः दूसरे भाव कि वृद्धि है तीसरा भाव
✓आपके सुखों (४ भाव) की हानी या व्यय है तीसरा भाव, क्योंकि मेहनत करने में सुख कहां। आपकी माता का व्यय है तीसरा भाव।
✓आपके बच्चों (५ भाव) की आय और इच्छापूर्ति है तीसरा भाव, आपकी शिक्षा का लाभ भी तीसरा भाव ही है। सट्टेबाजी लॉटरी आदि से लाभ भी तीसरा भाव है।
✓आपके शत्रुओं, ऋण, और रोग (६ भाव) से मिलने वाला उपलब्धि, ख़्याति, शक्ति, प्रतिष्ठा, रुतबा, मान-सम्मान, रैंक, विश्वसनीयता, आचरण, महत्वाकांक्षा है तीसरा भाव।
✓आपके जीवनसाथी (७ भाव) और आपके सहभागियों का भाग्य एवं दुर्भाग्य है तीसरा भाव।
✓आपके गुप्त ज्ञान एवं आकस्मिक लाभ (८ भाव) का गोपनीयता है तीसरा भाव, एवं आपके ससुराल की गोपनीयता भी यही है।
✓आपके पिता (९ भाव) का जीवनसाथी और सहभागी है तीसरा भाव, आपके भाग्य का निर्धारक भी यही है, आपके धर्म का पूजा पाठ का द्योतक भी यही तीसरा भाव है।
✓आपके कर्मों (१० भाव) से प्राप्त रोग ऋण शत्रु है तीसरा भाव और आपके कार्यक्षेत्र का कंपीटीशन भी यही है।
✓आपके मित्रों और बड़े भाई बहनों (११ भाव) की संतान और शिक्षा है तीसरा भाव।
✓आपके व्यय (१२ भाव) के द्वारा अर्जित सुख है तृतीय भाव।
तो इसलिए तृतीय भाव को केवल संचित पराक्रम, मेहनत, कम्युनिकेशन स्किल्स और खेल कूद ही ना समझें अपितु बहुत कुछ है ये तृतीय भाव।
*ज्योतिषाचार्य डॉ दीपक सिक्का*
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