#पंखुरी पंखुरी मन
11) आईना
आईना बुला रहा..
अपने पास,
पूछ रहा मुझसे..
अनगिनत सवाल,
क्या है ये वही अक्श..
जिसने गुजारे बत्तीस साल,
जो बदल गया तैतीसवे साल..
आईना बुला रहा,
अपने पास..
पूछ रहा मुझसे,
अनगिनत सवाल..!!
नहीं हिम्मत करुँ सामना,
कैसे बताऊं..??
गया वह जमाना..
लंबे समय तक साथ निभाना,
आईना बुला रहा,
अपने पास..
पूछा रहा मुझसे,
अनगिनत सवाल..!!
आईने को कहा,
बदल दे मेरी छवि..
दे दे अब पहचान नई,
जी सकूं मैं..
जैसे आजाद पंछी,
आईना बुला रहा..
अपने पास,
पूछ रहा मुझसे,
अनगिनत सवाल..।।
🌹सुमन कुमावत🌹