हल्दीघाटी :
या माटी हल्दीघाटी री लागे केसर और चन्दन हे ,
माथा पर तिलक करो इणरो इण धरती ने नित वंदन है !
18 जून 1576 को महाराणा प्रताप और अकबर के बीच हुए ऐतिहासिक युद्ध की गवाह है हल्दीघाटी !
इस युद्ध में हाकिम खां जैसे लडाका ने महाराणा प्रताप की सेना की कमान संभालते हुये अपने प्राणों को न्यौछावर करके सांप्रदायिक एकता की अनूठी मिसाल कायम की थी.
इसमें *झाला मानसिंह* .भीलू राणा. शमशाह तंवर और दानवीर भामाशाह सहित अनेक राजपूत (आज के गाड़िया लोहार ) अनगिनत योद्धाओं ने मेवाड की आन बान और शान की खातिर अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था.इसी हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप के जग प्रसिद्ध घोडे चेतक ने स्वामि भक्ति का अनूठा अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए महाराणा की प्राण. रक्षा के लिए अपने प्राण दे दिये थे !
जय हो उन शूरवीरो और दानवीरों की !! 🌹🙏🏻🚩