सुनेरी शाम को रंगीन रात में बदलते देखा है,
हा, मैने उसे मेरे करीब आते देखा है...
मेरे रूठने पर उसे परेशान होते देखा है,
हा, मैने उसे मुझको खोने से डरते देखा है...
मेरे रोने पर उसको अपनी बांहों फैलते हुए देखा है,
हा, मेने उसको मुझ पर अपना हक जताते देखा है...
हर बार नसे से दूर रहने की बाते करते देखा है,
हा, मैने उसे मेरे नसे में जुमते देखा है..
घर के सभी सदस्यों के पास अपनी मनमानी करते देखा है,
पर हा, मेरी बात को मानते देखा है...
मेरी दुनिया को उसे सजाते हुए देखा है
हा, मैने खुद को उसकी दुनिया बनते देखा है...