*जय मां शैलपुत्री*
*जीवात्मा योग*
जीव कारक देव गुरु बृहस्पति
+
आत्मा कारक सूर्य
अर्थात् *आत्मा+जीव* = *सूर्य+बृहस्पति* = *जीवात्मा योग*
इस युति को ही *जीवात्मा योग* कहते हैं।
अगर ये युति *अच्छे भावों* में एवं *पाप प्रभाव रहित* हो तो *अत्यंत शुभ* होती है।
अगर इस युति पर पाप प्रभाव आ जाए या ये युति खराब भावों (६, ८, १२) में बने तब ये अपना पूर्ण प्रभाव नहीं दिखा पाएगी एवं जितना पाप प्रभाव होगा उतना ही कम प्रभाव इस युति का प्राप्त होगा।
गुरु अस्त या वक्री हो या फिर गुरु और सूर्य में से कोई नीच और कमज़ोर हो या फिर ये योग शत्रु क्षेत्री हो तब भी इस योग के प्रभाव में कमी आयेगी।
कुल मिलाकर ये एक अत्यन्त शुभ योग है परंतु इसका पूर्ण प्रभाव बाकी बातों पर भी निर्भर करेगा।
*ज्योतिषाचार्य डॉ दीपक सिक्का*
*8178337165*
*www.absolutezone.in*
🙏🏻🙏🏻