#पंखुरी पंखुरी मन
2)आस
इस जिंदगी से थक गए हम,
जिंदगी को सुलझाने के लिए,
खुद ही उलझ गए हम।
मुझमें वो काबिलियत नही जो
सबको बना सके अपना
बना है यह सपना।
ख्वाब जो देखें टूट गए,
अपनो की महफिल में बेगाने हो गए।
आसमां के टूटे तारे हो गए,
ना जाने कहां गिर जाये।
ना कोई मंजिल ना कोई राह,
आपके दर से हैं आस,
जब तक चल रहे श्वास।
🌹सुमन कुमावत🌹