Hindi Quote in Blog by Mona Laxkar

Blog quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

निशा काम निपटा कर बैठी ही थी कि फोन की घंटी बजने लगी।


मेरठ से विमला चाची का फोन था ,”बिटिया अपने बाबू जी को आकर ले जाओ यहां से। 


बीमार रहने लगे है , बहुत कमजोर हो गए हैं। 

हम भी कोई जवान तो हो नहीं रहें है,अब उनका करना बहुत मुश्किल होता जा रहा है। 

*वैसे भी आखिरी समय अपने बच्चों के साथ बिताना चाहिए।”*


निशा बोली,”ठीक है चाची जी इस रविवार को आतें हैं, बाबू जी को हम दिल्ली ले आएंगे।” 


फिर इधर उधर की बातें करके फोन काट दिया।


बाबूजी तीन भाई है , पुश्तैनी मकान है तीनों वहीं रहते हैं। 

निशा और उसका छोटा भाई विवेक दिल्ली में रहते हैं 

अपने अपने परिवार के साथ। तीन चार साल पहले विवेक को फ्लैट खरीदने की लिए पैसे की आवश्यकता पड़ी तो बाबूजी ने भाईयों से मकान के अपने एक तिहाई हिस्से का पैसा लेकर विवेक को दे दिया था,

 कुछ खाने पहनने के लिए अपने लायक रखकर।

 दिल्ली आना नहीं चाहते थे इसलिए एक छोटा सा कमरा रख लिया था जब तक जीवित थे तब तक के लिए। 

निशा को लगता था कि अम्मा के जाने के बाद बिल्कुल अकेले पड़ गए होंगे 

बाबूजी लेकिन वहां पुराने परिचितों के बीच उनका मन लगता था। 
दोनों चाचियां भी ध्यान रखती थी।

 दिल्ली में दोनों भाई बहन की गृहस्थी भी मज़े से चल रही थी।


रविवार को निशा और विवेक का ही कार्यक्रम बन पाया मेरठ जाने का। 

निशा के पति अमित एक व्यस्त डाक्टर है महिने की लाखों की कमाई है उनका इस तरह से छुट्टी लेकर निकलना बहुत मुश्किल है,


 मरीजों की बिमारी न रविवार देखती है न सोमवार। 


विवेक की पत्नी रेनू की अपनी जिंदगी है उच्च वर्गीय परिवारों में उठना बैठना है उसका , इस तरह के छोटे मोटे पारिवारिक पचड़ों में पड़ना उसे पसंद नहीं।


रास्ते भर निशा को लगा विवेक कुछ अनमना , गुमसुम सा बैठा है। 

वह बोली,”इतना परेशान मत हो, ऐसी कोई चिंता की बात नहीं है, उम्र हो रही है, थोड़े कमजोर हो गए हैं ठीक हो जाएंगे।”

विवेक झींकते हुए बोला,”अच्छा खासा चल रहा था,पता नहीं चाचाजी को एसी क्या मुसीबत आ गई दो चार साल और रख लेते तो। 

अब तो मकानों के दाम आसमान छू रहे हैं,तब कितने कम पैसों में अपने नाम करवा लिया तीसरा हिस्सा।”


निशा शान्त करने की मन्शा से बोली,”ठीक है न उस समय जितने भाव थे बाजार में उस हिसाब से दे दिए।

 और बाबूजी आखरी समय अपने बच्चों के बीच बिताएंगे तो उन्हें अच्छा लगेगा।”


विवेक उत्तेजित हो गया , बोला,”दीदी तेरे लिए यह सब कहना बहुत आसान है। तीन कमरों के फ्लैट में कहां रखूंगा उन्हें। 

रेनू से किट किट रहेगी सो अलग, उसने तो साफ़ मना कर दिया है


 वह बाबूजी का कोई काम नहीं करेंगी | वैसे तो दीदी लड़कियां हक़ मांग ने तो बडी जल्दी खड़ी हो जाती हैं , करने के नाम पर क्यों पीछे हट जाती है।

continue... part 2

Hindi Blog by Mona Laxkar : 111714981
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now