क्या चचा किसका इंतज़ार कर रहे हो...देख रहा हूँ कि आप सुबह भी इस बेंच पर बैठे थे और अब तो शाम ढलने को आई पर आप अभी तक यंही बैठे हुए हैं ?
हाँ बेटा, मेरा बेटा मुझे लेने आने वाला है, बिल्कुल तुम्हारी उम्र का होगा। कह कर गया था कि वो मेरे लिए दवा लेकर आ रहा है लेकिन काफी देर हो गई अभी तक न आया, न जाने कँहा रह गया...इतना कहते कहते उनकी बूढ़ी आंखें आंसुओं से डबडबा उठीं।
कब तक आप यंहा उसका इंतजार करोगे, आप मुझे उसका मोबाइल नम्बर या अपने घर का पता दो तो मैं उससे बात करके आपको घर तक पहुँचा दूँ।
नम्बर ? मुझे याद नही।
तो घर का पता तो याद होगा। कँहा रहते हैं आप ?
हाँ...हाँ...घर का पता है न मेरे पास, मेरा बेटा जाते वक्त दे गया था। ये...ये देखो....कुर्ते की जेब से एक मुडातुड़ा कागज़ के टुकड़ा निकाल कर उन्होंने मेरी तरफ बढ़ा दिया।
मैंने वो काग़ज़ खोला जिस पर लिखा था " मदर टेरेसा ओल्ड एज होम"
मैंने उनकी तरफ देखा जिनकी वो बूढ़ी आंखें मुझमें अपना बेटा खोजती सी नज़र आईं और मैं किंकर्तव्यविमूढ़ सा कभी उन्हें देखता तो कभी उस कागज़ पर लिखे वृद्धाश्रम के नाम को।
#एकाकी