फरज भुलकर हक मांगने लगा है,
बडीभीड का वोभी हिस्सा रहा है।
नजर आ रहा है येकिरदार कैसा,
गुफतार काअबजो गाजी बना हो।
बढ़ती जरुरत ने बदला नजरीया,
ये पहोंचाकहां पर कहांसे चला है।
पनपने लगाहै तअस्सुबका जज्बा,
तअल्लुक हमारा अदावत भरा है।
बदलतेजहां का बिगडता नजारा,
खयालों पेअपने जो छाने लगा है।
बदलती रही है जीया रंग मासूम ,
चमनमें बलाकाजो गुल खीलाहै।
मासूम मोडासवी