उनका करम ही अबतो जीनेका है सबब,
जीनके बगेर जिंदगी लगती है बे सबब।
उल्फत का उनकी इतना जागा है वलवदा,
बढ़ती गइ विसाल की दिल में मेरे तलब।
उनसे जुड़ी है अपनी खुशी कायनात में,
तनहा जहां में जीते हैं हम हो के जां बलब।
बोजा उठाके जीते हैं उनके खयाल का,
सहेते रहे हैं आजभी फुरकत के हम करब।
नजरें उठाके देखना मासूम गुनाह बन गया,
उनके लीये तो हम रहे नादान बे अदब।
मासूम मोडासवी