अक्सर तेरा अक्स ढूढता हूँ आईने में,
पर खुद का चेहरा देख कर भी याद आता है,
कि मुझ मे भी तो तु ही है....
जब आईने में खुद को देखता हु,
मुसकुराता हु मै....ये सोच के....
की उसे मै इतना पसंद क्यो हु,??
ईस लीऐ आईने में , मै खुद को नही तुम्हे ढूढता हूँ,
वो आईना सिर्फ़ आईना नहीं मेरी जान ,
वो मुझे तुम्हारी याद दिलाने का जरिया बन गया है,
और मेरी मुस्कुराहट मे तुम्हारी झलक दिखा ने का काम करता है आईना .
-Ila Sheth