डर किस बात का
तुम्हे डर किस बात का है,
लोग तुम्हे नहीं अपनाएंगे इस बात का,
या फिर तुम खुद को अपना नहीं पा रहे हो इस बात का ।
तुम्हे डर किस बात का है,
लोग तुम्हारे बारे में सही सोचेंगे या ग़लत इस बात का,
या फिर तुम जो सोच रहे हो वह सही है या ग़लत इस बात का ।
अगर तुम सही हो तो तुम्हे डरना क्यों है,
तुम जहां हो, जहां खड़े हो वहां गभराना क्यों है ।
दूसरो को सोच कर में दूसरा बन जाऊंगा,
क्यों न मे मुझी को सोच कर में ही बन जाऊ ।
- एक महेक
#HitsHeart