तब कपड़े कम थे तन ढकने को फिर भी
पूरा तन ढकने का भरसक कोशिश करते
अब कपड़े बहुत हैं फिर भी
जानबूझ कर अंग प्रदर्शन करते चलते
तब कारें बसें ट्रेन और प्लेन कम चलते फिर भी
अपनों के सुख दुःख में हम जरूर शामिल होते
अब सब कुछ है फिर भी जाने से हैं कतराते
तब हमें पैसे कम पड़ते थे फिर भी
गाय गोरू को रोटी हम जरूर खिलाते
अब बगल में कौन भूखा है नहीं जानते
तब पैदल चल कर बच्चे मीलों स्कूल पढ़ने जाते
अब क्लास छोड़ बाइक से मॉल मूवी देखने जाते
तब घंटों ट्रंक कॉल बुक कर माँ बाप का हाल पूछते
आज हर पल फोन पास में फिर भी
व्हाट्सप्प और फेसबुक पर ज्यादा ध्यान लगाते
अब बुजुर्गों से ज्यादा समझदार वे खुद को समझते