रेखताके सौजन्य से🙏
कश्तियाँ सब की किनारे पे पहुँच जाती हैं
नाख़ुदा जिन का नहीं उन का ख़ुदा होता है
.. ....अमीर मीनाइ
उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है
.........राहत इंदोरी
मकतब-ए-इश्क़ का दस्तूर निराला देखा
उस को छुट्टी न मिली जिस को सबक़ याद हुआ
....मीर ताहिर अली रिज़वी
तुम्हारा दिल मिरे दिल के बराबर हो नहीं सकता
वो शीशा हो नहीं सकता ये पत्थर हो नहीं सकता
..........दाग दहेलवी
मुझे मायूस भी करती नहीं है
यही आदत तिरी अच्छी नहीं है
.. ...जावेद अख़्तर