दुनिया की बुरी नजरों से बचाने के वास्ते मां ने काला टीका लगाया,
बुरे और अच्छे लोगों के भी साए से बचाने की खातिर पिता ने अपनी परछाई से मुझे ढक लिया,
अंधेरी रातों ने जब मुझे डराया तो भाई की राखी ने उजाला कर दिया,
गम में जब भी नम हुई आंखें मेरी बहन की हंसी ने होठों पर मुस्कान ला दिया,
मगर यह सब तब काम ना आया,
जब मेरी आत्मा ने ही मुझे छल दिया,
मेरे अपनों ने तो मुझे सब से बचा कर रखा,
मगर मैं खुद को खुद से ही बचा कर ना रख पाई।
फिर दोष दूं तो मैं दूर हूं किसका,
जब समझ ही ना पाई मैं खुद को खुद की ही जैसा।।
-Shikha