काटो से भरे रस्ते पे
लड़खड़ा रही है ज़िंदगी
लहू से लथपथ पैरों के नीचे
शोर मचा रही है ज़िंदगी
सपनो के शिखर पर टूटी
सीडी से चढा रही है जिंदगी
गहेरे अंधेरे में ख्वाबों की
रोशनी जला रही है जिंदगी
खाली जेब में अकेले पन से
चिल्ला रहि है जिंगदी
यहाँ वहाँ रस्ते पे मुझे
युहि दौड़ा रही है जिंदगी
रिश्तों को तोड़जोड़ कर
कुछनाकुछ तो सिखा रही है जिंदगी
खुद को बदल ने की
साजिस कर रही है जिंदगी
पता नहीं जवाँ हो रही है
या फिर मर रही है जिंदगी।