# विषय .हवा ..
# विधा .कविता ***
सुकुमार फूलो की ,सुगंध लेती सी ।
शीतलता का एहसास ,देती सी ।।
मन की उष्णता ,को पल में हरती सी ।
दिल को खुशहाल ,बनाती सी ।।
पवन के धोडो पर ,आरुढ़ होती सी ।
तन मन की प्यास ,मिटासी सी ।।
सब में प्राणवायु ,अद्भुत भरती सी ।
पत्तो रुपी हाथों ,को हिलाती सी ।।
मधुमास का आनंद ,देती सी ।
पक्षीयों की तरह ,सुदंर चहकती सी ।।
सांय सांय की आवाज ,करती सी ।
कोयल की मीठी ,तान सुनाती सी ।।
वातावरण को ,मदहोश करती सी ।
खुबसूरत बयार ,नवयौवना सी इठलाती आ रही ।।
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