नजारे वो खिले थे आंखो में वो हसीन ख्वाब सारे आम मिल गए,
फुल से महकती हवाएं आज सारे आम सासो से रूह में गुल मिल गए
दरिया में मौजा आया करता लिफाफे ले कर सुनवाई करने ,
कानो में गूंजे वो आवाज बगावत कर किनारे में इश्क़ के पैग़ाम मिल गए,
रोशनी हुई आमतौर पर सारी दुनिया के हर कौने में,
हमे तो चांदनी रात में उजाले जहां की रातों में मिल गए,
खामोशियां से बड़ी बेदर्द कहानी मेरे अस्तित्व में भरी रही,
तुम्हारी नादानी में निकले अल्फ़ाज़ से इशारे से दिल को जागा बैठे,
हम तो अंजान बने नजाकत सोख के खातिर महुब्बत के सिलसिले में,
उनको देखने के पाने की करतब में हमारी जारी रही जिंदगी भी भूल गए,
प्यास बढ़ी रही सबकुछ होते हुवे भी उसकी सूखा सागर में जैसे मछली की तरह,
और क्या साहब आंखो में जलके आंसू मेरी जान को जान बनाकर हसते हुवे खुशियों से मिल गए।
DEAR ZINDAGI 🤗🙃