# कविता ...
# विषय .कुम्हार ..
कुम्हार जगत का ,प्रजापति होता ।
वह अपने हाथों ,मिट्टी का सृजन करता ।।
अनोखी कलाकृति ,से मिट्टी के सजीव नमूने ,
बनाता ।
प्रजापति ब्रह्मा ,विश्व का सृजन करता ।।
कुम्हार अपने ,चाक पर मटके मूर्ति बनाता ।
उसकी कला का ,कोई सानी नही होता ।।
उसकी कला की ,सभी प्रंशसा सदा करते ।
उसकी कला देख ,सभी दांतो तले अंगुली दबाता ।।
उसके हाथों में ,गजब का आकृषण होता ।
वह पल में मिट्टी को ,सजीव कृति बनाता ।।
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