#एहसास
सुनकर मेरी इन ख़ामोश नजरों की भाषा l
न रह पाया न कह पाया बो उलझा ही रहा l
न्याय क्या करता बो जो खामोशी को थामे रहा l
दबाकर मन मे चला गया एहसासों को चुपचाप l
न आने की खबर न जाने का पता चलने दिया l
मन मार चलता रहा सफ़लता-ए़-सफ़र मे ताउम्र l
दामन भी बो थाम न सका कभी किसी अोर का l
न सफ़र-ए़-राह मे कभी किसी राह बो तन्हा रहा l
- RJ krish... ✍️