गाय मे चौसठ करोड देवताओ का वास है ।
सुदंर रचना पढे...
मां की ममता से हर बचपन ,हरा भरा सा खिलता है ।
भाग्यवान संतानो को ही ,मां का आंचल मिलता है ।
विधाता की रचनाओ मे ,माता से बढकर कोई नही ।
मां के चरणो मे ही जन्नत का सुख मिलता है ।
त्याग ,बलिदान की गरिमा ,मां की छवि मे दिखती है ।
भाग्यवान संतानो को ही मां का आचंल मिलता है।
पूत कपूत भले हो जाये ,मां कुमाता नही बनती ।
चाहे जितना भी दिल तोडो पर दिल से दुरी नही धटती ।
मां के कद से छोटा मुझको रब का कद दिखता है ।
भाग्यवान संतानो को ही मां का आंचल मिलता है ।
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