जब इस दुनिया मे हम नाकाम हो जाए,
दुआ है तेरा हर प्याला जाम हो जाए।
यह बीच का रास्ता मुजे रास नही आया,
या मसहूर हो जाए, या बदनाम हो जाए।
सुबह का मारा, प्रतीक्षा दिन ढलने की,
दोपहर की जगह रंगीन शाम हो जाए।
कोई ऐसी मंडी दिखाओ मुजे दुनिया मे,
मेरा सब दिल-ऐ-दर्द नीलाम हो जाए।
फुरसत से मिलो कभी, में बताउगा तुम्हें,
वफ़ा भी कैसे महोब्बतमें इल्जाम हो जाए।
मनोज संतोकि मानस