विचारों का झुरमुट में
अब किसे खोज रहा तू..
तू तो बड़ा ज्ञानी है
इस बात पर तू अभिमानी है
फिर क्यो अब मूर्ख हो रहा है तू।
करता है मनमानी अब तक जो भी ठानी
ए मन चंचल तो था ही
अब बावरा हो रहा है तू।
तुझे ख़बर भी है किस देश में है तू
जरा देख तो ले कोन से भेस में है तू
अब ये क्या खुद को बना रहा है तू।
आरे मना मनव अज्ञान साही
तेरे जैसा उनमें ज्ञान नहीं
फिर भी धोखा खा रहा है तू।
तुझे भले ही उस पर गुमा होगा,
जिसे तू अब तक ना मिला होगा,
अच्छा ये तो बता कहा जा रहा है तू।
तू मुस्कुराता है तो खुशहाली होती है,
तू लड़ता है तो रात काली होती है
मेरे सपने सजा रहा है तू।
तू मेरा एसा कब हुआ,
जब मिला था मुझे आखिर तब हुआ,
एसे क्यो बहला रहा है तू।