Hindi Quote in Poem by Anupama Shri

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नकाब

चेहरे पर चेहरा
नकाब पर नकाब
जैसा इनका स्वार्थ
वैसा ही नकाब
कभी यह पर्दा उतरे,
तो पूछेंगे, जी कौन हैं आप!


असली चेहरे पर
कई नकली चेहरे
फिक्र है न खुल जाएं
कहीं राज गहरे
इसी कारण है कि
हैं सहमें, ठहरे।


असली चेहरे पर इतने
आवरण नहीं अकारण
स्वार्थ लोलुपता है
इसका कारण
मन में ,विचारों में
व्यवहारों में।


खुदगर्जी के कितने रंग
चेहरे बदलने कितने ढंग
असलियत छुपाने के इनके
कला कौशल देखकर
रह जाएंगे आप दंग।


झूठ, दिखावा,आडंबर सिर्फ यही
कितना, कब तक!
क्या खुद से छुपा है कभी
झांको अंतर्मन में
कभी पहचानो तो सही
जब आवरण हटाते हैं
खुद से तो नहीं डर जाते कहीं!

काश इन्हें मिले इतनी सद्बुद्धि
हो विचार मन आचरण में शुद्धि
तब नहीं पड़ेगा कुछ भी छुपाना
सहज संभव होगा असलियत दिखाना।

@अनुपमा अनुश्री

Hindi Poem by Anupama Shri : 111593716
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