यह सुख मेरा,यह दुख मेरा
यही रहा जीवन का पता,
यह प्यार मेरा,यह स्नेह मेरा
ऐसा रहा जीवन से नाता।
यह राग मेरा,यह द्वेष मेरा
ऐसा रहा जीवन से नाता,
यह जन्म मेरा,यह मृत्यु मेरी
यही रहा जीवन का रिश्ता।
यही शान्ति अधूरी,यही पथ निराला
यही रहा जीवन का किनारा,
यही ज्ञान छोटा ,यही मान क्षण का
यही रहा जीवन का मशविरा।
किसको जानना, किसको भुलाना
यही है जीवन से निकलना,
किसको जीताना, किसको हराना
यही है जीवन को बसाना ।
किसको मारना, किसको रखना
यही है जीवन को समझना,
किसको उठाना, किसको गिराना
यही है जीवन में उतरना।
**महेश रौतेला