Hindi Quote in Poem by Armin Dutia Motashaw

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फिर भी 


बोलियाँ, भाषाए भले  है अनेक हमारी, फिर भी हम, एक है । 


मज़हब और  जात पात भले हो अनेक , फिर भी हम एक हैं ।


पोशाक अलग, पगड़ी अनेक, कंहि  साडी, कंहि सलवार, फिर भी हम एक हैं 


मराठी, पंजाबी, मद्रासी, गुजराती, पर हम सारे हिन्दुस्तानी एक है ।


कहीँ भंग्डा, कहीं भरतनात्यम , गरबा,लावणी, बिहू, पर हम, एक

 हैं ।


संगीत भी अनेक, भजन, गजल, कव्वाली या शास्त्रीय,पर हम तो एक है ।


रसोई, व्यंजन अलग, तरह तरह के; यह सब एक ही माता देती है; इस लीये हम एक हैं।


राष्ट्र पिता महात्मा गांधी ने हमें एक रहने का आदेश दिया है, क्यूँ की हम एक है ।


कितना अच्छा होता, अगर नेता, मुल्ला, पंडित यह सच बताते, के हम सब एक है ।


चलो गाये, " मज़्हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, हिंदी है हम, हिन्दोस्ताँ हमारा "।


Armin Dutia Motashaw 

Hindi Poem by Armin Dutia Motashaw : 111591903
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