हमने किया था इंतेज़ार उसका,
आंखे बिछाई थी राहों पे,
दिलकी धड़कन होने लगी थी तेज,
सज संवर के बैठे थे,
पहली बार हमने उसकी पसंद के कपड़े पहने थे,
राह देखते हुऐ हम लोगोंको पागल नजर आ रहे थे,
जरूर से जल्दी है आ गए थे,
फिर भी वो नहीं आई,वो नहीं आई,
बस, उसका संदेश आया,लिखा था
" हमें माफ करना,हम मजबुर थे "
तभी से हम इतने जालिम हुए।
-Ashish Kunjadia