अहिंसा हो धर्म अपना , शांति राजधानी रहे
आदमी हो सब बराबर , अक्षुण्ण सबका पानी रहे
यदि कोई छेड़े हमें , और धर्म संकट में रहे
प्राण हो उत्सर्ग जितने , खून कितना भी बहे
धर्म रक्षा के लिए , हिंसा अहिंसा से बड़ी
पर्वत खड़े हों लाश के , नरमुंडों की लग जाए झड़ी
विश्व एक परिवार है , इसको समझकर हम चलें
शांति हो इस विश्व में , सब साथ मिलकर के चलें
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#अहिंसा