की अर्ज किया है,
बेबसी और पागल पन का वास्ता दे रहे है महबूब को,
इश्क़ में डूबे रूह से हर रुख का ताल्लुक दे रहे है दो जहन को,
इस दुनिया से उसे नहीं दिमाग से मिटाने हर दस्तूर पर,
जिंदगी में मिली गहराई से नजदीकियों में सफ़र को,
ऐसा क्यों हुआ, आए तो थे सिर्फ ये वज़ह जानने को,
खुदको फिर क्यू जख्म से भर जल कर राख करता है उसकी याद को?
DEAR ZINDAGI 💞