शानदार कविता पढ़े ..
#विषय .बेटी की पुकार ......
# छंदमुक्त कविता ......
कचरे में मत फेंक मुझे ,माँ मैं तेरे कलेजा का टुकडा हूँ ।
लोकलाज का पर्दा हटा ,माँ मैं तेरी स्नेह की ममता हूँ ।।
मुझे मार कर तू ,दिल ही दिल में खुब रोएगी ।
जब भी मेरी याद आयेगी ,दिल में सदा तू तड़पेगी ।।
अगर मैं नहीं रही तो ,यह सृष्टि का सर्जन कैसे होगा ।
लड़कीयाँ ही नही रही ,तो जननी ,दादी कौन बनेगा ।।
अकेला पुरुष क्या ,इस संसार को चला पायेगा ।
लडको की अहमियत रखने वालो ,खुद ही पछतायेगा ।।
लड़कीयाँ तो दो कुलो की ,शान आबरु रखती है ।
उसके बिना तुम अपनी ,बहु कहाँ से लाओगे ।।
समझो नादानो तुम ,लडका लडकी में भेद मत करो ।
लड़का लडकी तो ,कुदरत की अनोखी बख्शीश है ।।
पूछो उनसे जिनकी कोई ,औलाद नही है ।
चौधार आंसू बहाते है ,जिनके संतान नहीं है ।।
लड़की को गर्भ में मत मारो , यह कृत्य मत करो नादानो ।
अपने अस्तित्व को बचाने ,ऐसे कृत्य मत करो शैतानो ।।
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