शानदार कविता पढे ....
# हास्य व्यंग्य कविता .सपने ****
हम कर चुकाते ,चुकाते थक गये ।
पल हाल हमारे ,बेहाल ही होते गये ।।
सुदंर सड़को के ,सपने हमने सजाये ।
पर उबडखाबड ,सड़को पर हिचकोले खाये ।।
स्वच्छता के सपने ,हमने खुब सजाये ।
पर हर जगह कचरे ,के ढेर के दशर्न पाये ।।
पढ़ने के खुब सपने ,हम सबने सजाये ।
पर शानदार विधालय ,शिक्षक देखन पाये ।।
होस्पिटल के रमणीय ,सपने सबने सजाये ।
पर लुटखोर होस्पिटल ,ही आज तक देखते आये ।।
चौबीस धंटे बिजली ,के सपने सजाये ।
पर आज तक हमारे ,धर रोशन हो न पाये ।।
अमन चैन के ,सपने खुब सजाये ।
पर सीमाओ पर ,शत्रु की बुरी नजर से नही बच पाये ।।
स्त्रीयों को श्रेष्ठता ,का दर्जा देने के सपने सजाये ।
पर हैवानियत की दृष्टि ,से उनको बचा नही पाये ।।
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