maa ka aanchal
by lokesh sharma
हवा ने टपकते हुए पसीने से कहा| तू एक बार लहरा के साँस ले ले जरा|| मैंने कहा मेहनत और मन्नत से ही तस्वीरें बदलती हैं| तकदीरों में जो तहरीर छुपी हुई है, वह हकीकतन होने को है|| तो गोया...
हवाओं से कह दो कहीं और जाकर बहै, हमें जुनूनीयत के पसीने से तकदीर बदलनी है|||
हवा मुस्कुराई
तेरे पसीने को गिरने से नहीं रोक सकता मैं| यही तो फौलादी निर्माण को मुक्तमईन रखती है|| साहिब ! पर वादा है मेरा,...
जब भी मुझ को छूकर निकलेगा तू| एक ठंडक, माँ के आंचल सा पाएगा तू||