गुलामी किसको पसन्द है हम तो मालिक हैं, सुख में ना सही पर दुःख में तालूक् है । धोबी मैला साफ नहीं करेगा तो कोन करेगा ? एहेसास् इनसान को नहीं होगा तो किसको होगा ? खाई देखकर भी आखं बन्द करके चलते हैं, अनजान नहीं जानबुझकर मरते हैं । यहां कोई सगा नहीं सब अपने के भेश में रेहते है, फिकर नहीं सीफ् दिखाबे से यादों का ताजा करते हैं । घाउँ भरा तो उखाड देते है, हम हैं साथ ये झूठा दिलासा देते हैं । वैसे गलती उनके नहीं हम मजबूर करते हैं, पता मालुम है फिर भी उनको ढुडंते है । मालुम है वहां सोना नहीं फिर भी हात डालते हैं, हम इनसान भी क्या खुब् है गलतीपे गलती पर सुधारना नहीं चाहते हैं ।