आज भी सम्मान में, हर सिर नमन हो जाता है,
सिर्फ़ उसकी शान में, गैरों से यूँ भिड़ जाता है,
छोटे दायरों से उठकर जो सोचें, तो देश ही ईमां-धर्म है,
अभिमान सीने में है जगता, जब अपना तिरंगा लहराता है।
उस शान को न खोने दें हम,
उस नाम को न होने दें कम,
आओ प्रण लें कुछ ऐसा,
विश्व देखे हिन्दुस्तान का दम।