उदास लड़कियाँ खोजनी नहीं पड़ती,
बहुत आसानी से मिल जाती हैं।
कभी रसोई में उफनते दूध के पास बेख्याल खड़ी,
कभी घंटो रुकी हुई किताब के किसी पन्ने पर
चाय बिगाड़ती हुई,
रोटियाँ जलाती हुई
शाम को छत पर इयरफोन लगाए गीत सुनती
पर गीत के बोल पूछने पर
सकपकाती हुई।