बहुत जिद्दी है कुछ सपने
रात को संवारती हूं सजाती हुं
और सुबह को पलकों के नीचे दबा देती हूं Bindu 🌺
दिन के उजाले में फिर से जाग उठते हैं वह
कितना भी छुपाऊं, पलकों तले निकल आते हैं वह
कुछ जिद्दी से सपने जो है पलकों के आशियाने में बंद
सच होने के लिए हो रहे हैं बावरे कुछ जिद्दी सपने