जो बह गया सो बह गया
जो आँसुओं में रह गया,
वह भी बह गया।
आकाश का नक्षत्र था
जो बार बार दिख गया,
जल तो बह गया
तीर्थ पवित्र रह गया।
जिसे रहना था वह रह गया,
अवसान जिसका होना था
वह हो गया।
मुसाफिर गुजर गया
रास्ता वहीं रह गया,
आने वाला तो दिख गया।
अनन्त को रहना है
वह यहीं रह गया,
जिसे टूटना था सो टूट गया।
**महेश रौतेला