क्या गावू क्या सुनावू लब्स होठो पे आकर रुक जाते है!बोल ना बहोत है! बोल नहीं पाता हूं! केहना बहोत है! केह नहीं पाता हूं! क्या गावु क्या सुनावु याद नहीं कर पाता हूं! जावू तो जावु कहा में, ये दिल तू बता मुझे में क्या करू क्या नहीं!
अश्विन राठौड़
"स्वयमभु"