इस दुनियाँ में काश सिर्फ़ रूहें ही होतीं,
और कोई शख़्सियत ना होतीं।
ना शरीर होते, ना उस पर अधिकार सजते,
ना ज़ख़्म होते, ना उस के हाहाकार गूँजते
ना दिल होता, ना दर्द होता।
ना होती मोहब्बत, ना प्यार होता,
ना सधा हुआ कोई व्यवहार होता।
क्लेश और द्वेष के लिए जगह ना होती,
ना घृणा एवं कलह ही कोई वजह होती।
ज़मीन और आसमान के मध्य सिर्फ़ सुकून होता,
घर होते बादलों के बीच, रिश्ते रुहानी होते।
रातें शाश्वत होतीं और दिन सुहाने होते।।
काश सिर्फ़ रूहें ही होतीं।।।
#shekharspeaks