"भावनाओ की जमीन पर चलते हुए भी,
कदम संतुलित रहते है मेरे, मै सक्षम हूँ उन्हें गति और विराम देने मे|
"आखिर आत्मसम्मान से पोषित जो हूँ ,
सबकुछ समाप्त होने पर भी अस्तित्व साँस भरता है |
"अरे! खाली कहाँ हूँ मै, अंधेरे की सघनता ही ,
अनंत प्रकाश भरती है|"
#सक्षम
-- Ruchi Dixit
https://www.matrubharti.com/bites/111502830
#सक्षम