ना दोस्ती मीली.....
ना प्यार मीला......
हर मोड पर एक मतलबी यार मीला.....
तमाशा बन चुकी जिंदगी हमारी......
हर कोई अपने मक़सद का तलाबगार निकाला....
हमें तो सब पर यक़ीन था पर वही ज़रुरतेयार निकाला...
सायद मेरी ख्वाबगाह कुछ ज़ादा हीं थे इसीलिए रह गया में अकेला...
हमें तो हमारी रूह से ज्यादा मानते थे उनको सायद उसीको हमारा एतबार ना रहा....
हमे क्या एतराज़ ए जिंदगी तुमसे जब अपने हीं बेगाने निकाले...
तमाशा बन चुकी है ज़िदगी हमारी....
औरो से क्यां करुँ रुसवाई......