हे मन! मै उनकी शरण मे हूँ ,
जिन्होने अखण्ड ब्रम्हाण्ड की रचना करने वाले
भगवान श्री ब्रम्हा ,श्रृष्टि के समस्त कार्यो का वहन , नियंत्रण करने वाले श्री भगवान विष्णु एवं ,
असंतुलित अवस्था को प्राप्त होने पर विनाश कर पुनः
निर्माण के लिए प्रेरित करने वाले भगवान शंकर को बनाया है |
हे मन ! मै उनकी शरण मे हूँ जो सर्वव्यापी है , एकमात्र दृष्टा है , जो भावों से परे है , जिनका स्वभाव केवल करूणा है, जिनका न आदि है न अन्त जिन्हे जानने के लिए कोई मार्ग, कोई साधन पर्याप्त नही |
हे मन ! मै इनकी शरण मे हूँ जिन्हे करोड़ो वर्षो की तपस्या से भी नही जाना जा सकता और जो क्षणमात्र मे प्रकट हो जाते है | इनको जानना केवल इनकी कृपा है | जो परमब्रम्ह है , जिन्हे जानने के बाद कुछ भी जानना शेष नही रहता , ऐसा मैने परम्परागत ऋषि मुनियोंऔर विद्वानो द्वारा सुना है|
हे मन! अब तू संशय का त्याग कर ,
स्वयं की उत्पत्ति का उद्देश्य समझ इस क्षणभंगुर शरीर को इसी ब्रम्ह की सत्ता मे स्वयं को समर्पित कर दे , क्योकि अन्य विकल्प तेरे पास शेष नही , इस शरीर के मोह को त्यागने के प्रयास मे सफल होना ही , ध्यान और साधना है|
श्री गुरूवे नमः 🙏नमः शिवाय 🙏, नमो भगवते वासुदेवाय 🙏अओम् परमात्मने नम:🙏
#झेन