छोटी सी ग़ज़ल...
गम के बाद ही खुशियों की सदा आती है,
तू हौसला ज़िंदा रख,आसमां से भी दुआ आती है।
किस्मत के खेल पर भरोसा कम ही रखता हूँ मगर,
तजुर्बा कहता है मेरा, मेहनत यकीनन रंग लाती है।
शहर की रंगीनियों से थोड़ा फ़ासला लाज़िम है,
कि हवा..बिगाड़ने वाली भी इधर ही से आती है।
मोहब्बत के घरोंदो को बनने में वक़्त नहीं लगता,
बात निभाने की आती है तो सांसें टूट जाती है।
इस दौर -ए- खुदफरेबी में अना को टूटने मत देना,
कि वक़्त तो बीत जाता है और बातें छूट जाती है।।
@अनुराग मांडलिक "मृत्युंजय"