# ग़लत
ग़लत सही की परिभाषा में मत पड़ जाना मन
कुछ तो लोग कहेंगे ,ख़ुद को यह समझाना मन
रात्रि का घिरना नींद के लिए ज़रूरी है
सूरज का उग जाना आशा की मंज़ूरी है
दिन को रात कभी न कहना जो भी लोग कहें
अपने सुर से सुरभित होना ,मत दुःख पाना मन
रहम-करम और सुख-दुःख सारे चलते जाएँगे
यह तो जीवन है इसमें कुछ खोए ,पाएँगे
कभी किसी को दुःख न दो ,स्वयं भी न ओढ़ो
जिसने जो भी किया समय की धुरी पर ही छोड़ो
श्वाँस रहे जब तक इस तन में मत घबराना मन
जिसने जन्म दिया पाला है ,उसको सब अर्पण ----|
डॉ. प्रणव भारती