#Wet Parents Eyes 👀 helplessly
seeing the Whole night kids Act...!!
My Realistic Poem...!!!!
भूल जाओ पुरानी बातों को यारों
हर घड़ी अगर वह बात कष्ट देती
कुछ नयी बातें भी तो आजमा लो
देख तो लो कहाँ तक ले के जाती
बुलंदियाँ ख़्यालों की परवाज़ से
बेशक तुम छु भी लो चाहे जितनी
मगर पैर ज़मीन पे ही जमाए रखो
बिना जड़ तो टहनी भी न टिकती
असल-व-नक़ल में अंतर भले ही
ज़्यादा न हो,परख असलकी होती
नस्लों की फसलों को लगी दीमक
कारीगरी क़ुदरतकी नुमाइश बनती
बहकते यौवन-घन रातकी बात में
लगाते दाव पे,ख़ानदानी भी गिरतीं
तड़प के रह जाते,ग़म बेइज़्ज़ती के
पी के,औलाद-ज़बाँ नस्तर चुभोतीं
आँख उठाकर देखना जुर्म था कभी
बुजुर्गोंकी क़ीमत कोड़ी मोल दिखती
क्या ज़माना,क्या पहेरन,क्या शरम
आँखोंसे बेपरवाह बे-हयाई टपकती
ये प्रभुजी ही जानें कहाँ जा के रुकेंगी
फ़ैशनके पर्दे में फैलती बीमारी डँसतीं
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