बहुत घमंड था अपने को , विश्व बिरादरी का अगुवा बनाने का
था मद में चूर सच्चाई से दूर , पागल था डर का हौआ बनाने का
धोखेबाजी में माहिर वो , आखिर दिखलाया रंग ज्यों गिरगिट सा
था भूल में वो ललकार दिया , भारतीय रणबांकुरे शेरों को
जोरदार सिखाया सबक उन्हें , डर के भागे सर में रख पैरों को
अकड़ पड़ गई ढीली यूं , मुर्दे में जान ज्यों अाई हो
सपने धूमिल हो गए सभी , ज्यों आईना में धूल चढ़ अाई हो
जी भर अहसास दिलाया है , धोखेबाज कायर चीनियों को
गलवान का दु:स्वप्न डराएगा , अनगिनत चीनी पीढ़ियों को
भौंचक होकर मल रहे हांथ , सोचा था क्या हो गया है क्या
ये तो कालों के काल हैं जो , मसले हैं हमें ज्यों गाजर मूली
है अक्ल ठिकाने अाई है , ये गलती न कभी दोहराएंगे
अपने में आ गए भारतीय यदि , हमें पानी में घोल पी जाएंगे
#जोरदार