करती हु जितनी मोहोब्बत तुजसे
तुम भी मुझसे कर लो ना
नहीं चाहती पूरी ज़िन्दगी तुम्हारी
बस कुछ लम्हे मेरे नाम कर दो ना
तुम्हे काजल बना के रख लू अपनी आँखों मे
तुम आँचल बनके सीने से लग जाओ ना
छूकर अपने होठों से मेरे होठों को
जिस्म से रूह तक मे बस जाओ ना
नहीं बनूँगी तुम्हारी मंज़िल के रास्तो की रूकावट
अपनी कमजोरी नहीं अपनी ताकत मुझे बना लो ना
चुरा लुंगी तेरी ज़िन्दगी से हर गम तुम्हारा
तुम भी मेरी ज़िन्दगी मे खुशियाँ थोड़ी सी भर दो ना
पता है मे तुम्हारी कहानी मे नहीं ना हक़ है मेरा तुम पे
पर जब तक अकेले हो तब तक मेरे बन जाओ ना
मिल जाये हमसफर कोई बेशक़ चले जाना मोहोब्बत बेहिसाब रहेगी तब भी
बस थोड़ी सी यादे मेरे नाम कर जाओ ना
करती हु जितनी मोहोब्बत तुजसे
तुम भी मुझसे कर लो ना
नहीं चाहती तुम्हारी पूरी जिंदगी
बस चन्द लम्हे मेरे नाम कर दो ना