हो सदा के लिए शांत,
चला गया सुशांत,
था इतना अंधेरा, इतना गहरा अन्दर,
मानो कोई काला समन्दर,
तोड़ कर अंदर से बाहर,
बहा कर आँशुओं का सागर,
हो सदा के लिए शांत,
चला गया सुशांत।
जीवन संचित कर अपार,
सुनी न उसने किसी की पुकार,
छोड़ गया जनक को बीच मझधार,
हो सदा के लिए शांत,
चला गया सुशांत।
रोता अंदर ही अंदर,
हँसता बस ऊपर,
छोड़ अपनो का प्यार,
हो सदा के लिए शांत,
चला गया सुशांत।
##SSR