कुछ शेर है -खुल्द -स्वर्ग -paradise
1) मैं जहाँ क्यों छोडूंगा मै खुदा क्यूँ चाहूंगा
तेरे बांहे खुद खुल्द है तुम्हे खुदा मानूंगा
2) सब खुल्द की चाह में क्या क्या कर रहे
माफ करना खुदा मुझसे तेरी इबादत न हुई
3)खुल्द की तलब है जहाँ को जहनुम बना दिया
जंग जीत लौटा शहसवार औ माँ को रुला दिया